TatwaBodhani ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते | पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वशिष्यते ||

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तत्त्व बोधिनी का अर्थ तत्व को जानना है, और तत्व को तभी जाना जा सकता है जब हमारे पास प्रज्ञा चक्षु हो अर्थात प्रज्ञा = ज्ञान, चक्षु= नेत्र, आंख, अतः हमारा उद्देश्य लोगो के मन से अविश्वास, शक, इत्यादि हटा के उनको उनके कर्म और धर्म के प्रति जगाना है। आज के समय में ऐसे लोगों की संख्या काफी हो गई है जो रिवाजो को ढकोसला या अंध विश्वास मानते हैं, प्रज्ञा चक्षु ऐसे विचारों का समर्थन करता है लेकिन सभी बातों में नहीं । जैसे मेरा एक मित्र है जो मंदिर के अन्दर नहीं जाता कभी, हम जायेंगे तो वो हमारा इंतजार बाहर में करता है, उसका कहना है कि माँ बाप ही भगवान है बांकी कोई भगवान नहीं होता, मैं उसका समर्थन करता हूँ, मैन उसको एक दिन कहा कि भाई तेरे नास्तिकता में भी आस्तिकता है वो ऐसे कि तुम भगवान (ईश्वर) के अस्तित्व को अपने माँ और पापा में देखते हो। वैसे भी धरती पे माँ, बाप और गुरु ही ईश्वर के तीन गुण हैं जैसे माँ जन्म देकर सृजन करती है यानी वो ब्रह्मा है, पिता हमारा पालन पोषण करता है जो विष्णु है और गुरु हमें ज्ञान देता है और हमारे अज्ञानता का नाश करता है जो शिव है। शिव को वैसे जगतगुरू भी कहा जाता है।

प्रिये पाठकों हमारा उद्देश्य इस ब्लॉग के माध्यम से आपके अंदर के सभी नकारात्मकता को बहुत हद तक सकारात्मकता में परिवर्तित करना है। आज मनुष्य के समक्ष भौतिकता की भड़मार है लोग जैसे देखते हैं जिसे सुनते हैं और जिसे छू सकते हैं उसी को सत्य मानते है जो कि वास्तविकता नहीं हैं ठीक वैसे ही जैसे कोई सिनेमा या कोई भी वीडियो जो tv पे या नेट पे या किसी भी डिवाइस पे दिखता है वैसा सही में नहीं होता।

हम अपने ब्लॉग के माध्यम से आज के वैज्ञानिक नियम को हरे वेदों के नियम से मिलान करके सत्यता को दिखाने की कोशिश करेंगे।

आज का समय ऐसा है कि लोग अपने दैनिक कार्यों में इतने व्यस्त होते हैं कि अपने मूल को जानने का समय नहीं होता ऐसे में उन्हें जो मिलता है उसी को सच्चाई मानते हैं और जो सत्य है उसपर विश्वास नहीं कर पाते इसका कारण है कि वे जो नज़र आता है उसपर अंध विश्वास वे उसके पीछे की छिपी सत्यता को नहीं समझ पाते आज गुरु भी कई हैं और उनके शिष्य भी कई लेकिन ये रिस्ता बेकार है क्योंकि ये रिस्ता ज्ञान और सत्यता पर ना होके अंधविश्वास और पैसे कमाने का साधन बन गया है लोग इतने अंधे हो जाते हैं कि सहि क्या है नहीं सोच पाते और समझने की भी कोशिश नहीं करते |

हम प्रज्ञा चक्षु के माध्यम से आपको बताने की कोशिश करेंगे कि सत्यता क्या है हम अपनी बात को आपके सामने वैदिक रीति और आज के वैज्ञानिक तरीके से सिद्ध करने की कोशिश करेंग | आपके मन मे किसि भि प्रकार की दुबिधा हो आप बेझिझक पूछ सकते हैं और मैं अपने क्षमता के अनुसार उसका उत्तर देने की कोशिश करूंगा ।


आप अपने मन मे उठ रहे किसी भी प्रश्न को हमसे साझा कर सकते हैं हम आपके प्रश्नों का उत्तर ईमेल के माध्यम से भेज देंगे तथा उसे अपने इस ब्लॉग पे प्रकाशित करेंगे। हमारा ईमेल- tatwabodhini@gmail. com,
Whatsapp no.- 9717809053, 9812646403

धन्यवाद

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