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भूत, प्रेत या ऊपरी हवा का क्या चक्कर है?

प्रिये पाठक हिन्दू धर्म के वेद और शास्त्र बहुतो अजीब और अलौकिक रहस्यों से भड़ा है, ये विज्ञान का वो समूह है जिसपर लोग आसानी से विश्वास नहीं करते, विश्वास ना करने का कारण है हम अपने आप को पूर्ण समझते हैं, हम कभी भी अपने ज्ञान और अपने क्षमता से ऊपर या बाहर नहीं देखते, हम जितना जानते हैं उसे ही ज्ञान और दुनिया समझते हैं, हमारे अंदर ये भावना होती है कि जितना मुझे ज्ञान है वही पूर्ण है और इससे हटके कुछ नहीं है, यानी हमारी हालात उस महात्मा जी के तोते जैसी है, रटि रटाई विद्या, कहने का मतलब की हमने 2+2=4 पढ़ लिया तो यही होगा 5+4=9 नहीं हो सकता।

खैर इन सबकी चर्चा हम बाद में फिर कभी करेंगे अभी हम भूतों की दुनिया पे आते हैं।
भूत = past=बिता हुआ यानि भूत वो होता है जो बीत चुका है, किसी व्यक्ति के मृत्यु के बाद उसकी उपस्थिति ख़त्म हो जाती है और उसके मृत्यु के बाद का जो भी समय बीतता है वो बर्तमान लोगों के लिए भूत होता जाता है।

अब प्रेतात्मा= पर:+आत्मा=प्रेतात्मा, यानी दूसरे की आत्मा प्रेतात्मा होती है, प्रेत=परः+इत(बिता हुआ)=प्रेत ,अब आपके मन मे ये जरूर आ रहा होगा कि ये क्या परिभाषा दिए जा रहा है कुछ समझ नहीं आ रहा, तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरा उद्देश्य तत्व को समझाना है इसलिए मैं किसी चीज को पहले परिभाषित करता हूँ ताकि आप सच्चाई को समझ सकें।

अब आपको मैं बताता हूँ कि ये भूत या प्रेत लोगों के ऊपर कैसे आता हैं?

तो प्रिये पाठकों इसका बहुत तरीका, कारण और स्थिति होता है, आइये जानते हैं।

जैसा कि हम में से ज्यादा तर लोग जानते हैं (खास करके हिन्दू) कि मनुष्य जब मरता है और उसका अंतिम संस्कार किया जाता है तो लाश जलते वक़्त ब्रेन ब्लास्ट करता है, उस ब्लास्ट में उसके मस्तिष्क से एक वेव निकलता है वो वेव इस वायुमंडल में हवा के साथ तैरता रहता है। यह वेव नष्ट नहीं होता ।

(अ)- अब ध्यान दीजियेगा मेरी बातों पर तो आपकी समझ में ये बातें आ जायेगी नहीं तो कुछ समझ नहीं आएगी। तो जैसा कि मैं कहना चाहता हूँ, जिस मनुष्य या जीव का आत्मविश्वास कमजोर होता है उसका दिमाग खाली होता है और खाली दिमाग पाके वो वेव जो हवा में तैर रही है अपना जगह बना लेती है, जैसे आप पानी को जमीन पे गिरा के देखें पानी बहता रहेगा लेकिन उसे जहाँ पर छोटा सा भी छेद मिलेगा वो उसमे चला जायेगा यही नियम यहाँ भी लागू होता है।

आपने अपने आस पास देखा भी होगा कि जो व्यक्ति कमजोर दिल का, निगेटिव सोच का डरा डरा सा रहने वाला होगा उसी के साथ ज्यादातर ये भूत वाली घटना होती है। जिस व्यक्ति का वेव पीड़ित के मस्तिष्क पे कब्जा करता है पीड़ित उसी की भाषा और व्यवहार करता है। ऐसी घटनाओं के विषय में मैंने कई कहानियां सुनी है इसका गवाह मैं नहीं बना अभी तक क्योकि ऐसी घटना बहोत कम होती है। बस एक सुनी सुनाई कहानी बता रहा हूँ उदाहरण के लिए, कहीं पर एक किसान के दिमाग पे तीन लोगों का भूत(वेव) आ गया एक डॉक्टर का, इंजीनियर का और एक जैब विज्ञानी का जिससे वो ऐसे ऐसे जगह पे रेलवे लाइन बिछा दिया जहाँ उस समय मे संभव ना था, उसने ऐसे ऐसे ऑपरेशन किये जो किसी डॉक्टर के लिए संभव नहीं था, उसने ही वहाँ बंजर पड़े जमीन में खेती का रास्ता बनाया। आज बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जो अपनी उम्र से ज्यादा नॉलेज रखते हैं, चुकी बच्चा जब गर्भ से बाहर आता है या अपने माँ के गर्भ में रहता है तब उसका दिमाग शून्य ही रहता है और उस समय ऐसा हो सकता है ।
(इस स्थिति का मेरे पास कोई प्रमाण नहीं है।)

(ब)- अब भूत का दूसरा पक्ष भी बताता हूँ इसका भुक्त भोगी मैं खुद भी हो चुका हूँ, असल मे होता यह है कि किसी किसी में नकारात्मक सोच की भरमार होती है, ऐसे व्यक्ति हर चीज में नकारात्मक विचार रखते हैं और उनकी शक की निगाह भी होती है उनके पास, ये सोच उनको गहरे अवसाद में ले जाता है और अवसाद में जाने के बाद वो अजीब अजीब सी हरकतें करने लगता है, वो खयालों की दुनियां बना लेता है खयाली बातें करता है। इसका उदाहरण मेरे अपने घर  मे ही है उसकी कहानी मैं बताता हूँ आप खुद समझ जाएंगे कि भूत का क्या रहस्य है।

मेरे अपने ही घर में मेरे अपने नजदीकी रिश्तेदार की स्थिति कुछ इसी प्रकार थी, बचपन मे वो 6-7 साल की थी तब उसको उसके नानी के यहाँ रहने के लिए छोड़ दिया गया, उस समय उसके नानी गांव मे उसके साथ जो व्यवहार होता था उसको वो नकारात्मक रूप से लेती थी नानी के यहाँ थोड़ा मजाक तो चलता ही है लेकिन ये सब उसको बुरा लगता था, वो हमेशा यही सोचती की उसका कोई नहीं है, उसको अपने माँ पापा से भी नफरत होने लगी।
उसको 8 साल के बाद अपने पापा माँ के पास लाया गया, तब तक वो पूरी तरह नकारात्मक सोच से भर चुकी थी, जिस कारण सबको शक की निगाह से भी देखती और कहती कि मेरा कोई नहीं है मैं जीना नहीं चाहती, मुझे किसी से मतलब नहीं है और भी बहुत कुछ, फिर उसकी शादी हुई तो उसको थोड़ी सी उम्मीद जगी की कोई तो अपना हुआ, लेकिन उसकी सोच के अनुसार उसका पति भी नहीं निकला, ऐसा नहीं कि दोनों में बनती नहीं या गलत कुछ बल्कि प्रॉब्लम ये था कि लड़का भाई में छोटा था और लड़की के अनुसार सेट होने के लिए वो टाइम ले रहा था, और हर कोई लेगा, इस पर लड़की को लगता कि मेरा पति भी मेरा नहीं है और ये सारी सोच मिलके उसको गहरी अवसाद में ले गया उसका इलाज भी चला लेकिन दवा क्या काम करता जबतक उसके दिमाग से ये उल्टी बातें ना हटती लोग समझे दवा काम नहीं कर रहा ऊपरी हवा और नजर दोष है, और फिर उसका झार फूंक का इलाज शुरू हुआ मैं भी इन सब में पीस रहा था मैंने अपने वाइफ से पहले ही कह दिया था कि ये अवसाद ग्रस्त है क्योंकी वो बच्चों जैसी हरकतें करती और बार बार माँ को ढूंढती और कहती मेरा कोई नही है मैं अकेली हूँ, और यही सारि बातें वो पहले गुस्से में भी बोलती थी। अब उसकी स्थिति सही हुई है बिना इलाज के ही क्योंकि उसको एक मकसद मिल गया कोई उसका अपना आ गया उसका बच्चा।

(स)- अब यहां तीसरा लक्षण और स्थिती बताता हूँ। इसको लोग पर्सनालिटी डिसऑर्डर भी कहते हैं जैसा एक हिंदी मूवी भूल भूलैया में है, इसमें लोग अपने आप को किसी दूसरे पात्र के रूप में पेश करता है। इस स्थिति के लिए वो परिस्थितियां जिम्मेदार होती है जिसमें मनुष्य अपने जीवन से खुश नहीं होता, वो किसी दूसरे की जीवन से उसके व्यक्तित्व से प्रभावित हो जाता है और उसका दिमाग उस चरित्र में अपने आप को समझने लगता है। इस तरह की घटनाएं आज आम बात है, जैसे कभी कभी हमें सुनने में आता है कि कोई व्यक्ति कहता है मैं ईश्वर का अवतार हूँ, तो कोई कहता है मैं फलाने का दूसरा जन्म हूँ इत्यादि।

तीनो स्थिति में आपने देखा कि लोगों में आत्मविश्वास की कमी होने से ही और अपने प्रति हीन भावना आने पर ही ये होता है।

इन सबसे छुटकारा पाने के लिए पहले लोग झार फूंक वाले के पास जाते हैं या किसी मनोवैज्ञानिक के पास।

ये लोग उस व्यक्ति में आत्मविश्वास को जागते हैं, झार फूंक कोई मंत्र द्वारा तांत्रिक तरीका नहीं है। ये सब मनोविज्ञान से ही युक्त है लेकिन आज इसमें भी बस लोभ और मुर्खता भर चुका है। मैं खुद ज्योतिष हूँ, मैंने आचार्य किया है, तो मैंने इन सब पे खुद अपना शोध किया और जो जाना वह शेयर कर रहा हूँ, मैंने भी कितने लोगों के भूत झारे हैं इसमे बस थोड़ा सा ट्रिक होता है मैंने कोई सिद्धि नहीं की है फिर भी सफल रहा। झार फूंक में बार बार पीड़ित से पूछा जाता है कि तुम कौन हो? कारण वो अपने असली रूप को पहचाने, इसमे थप्पर लगाया जाता है कारण उसका शरीर, नब्ज दर्द को महशुस करेगा तो अपने वास्तविक ज्ञान को जानेगा लेकिन आज मूर्ख तांत्रिक सब इस बात को नहीं जानते और पीड़ित के सामने ऐसे पेस आते है जैसे विश्वयुद्ध में आये हों अपना रॉब जमाने के लिए, उन्हें ये नहीं मालूम कि थप्पर किस तरह और कहा मरना है ताकि उसके शरीर को थोड़ी सी दर्द महशुस हो, इसमें थप्पर इस तरह मरना होता है जैसे हम किसी शिशे की वस्तु को थपथपा रहे हों और ये थप्पर उस जगह मरना होता है जहाँ से हमारे मस्तिष्क को सीधा संदेश जाए।

आप ये सोच रहे होंगे कि ये क्या कह रहा है ? ऐसा है तो भूत दिखता कैसे है?

मैं आपको वतना चाहूंगा कि आत्मा तो है और वो भी इस वायुमंडल में ही हवा में तैरता है । अभी कुछ सालों पहले वैज्ञानिकों ने god particel के ऊपर रिसर्च किया था जिसमे उन्हें बहुत मेहनत के बाद ये कण दिखे थे तो ये कण ही आत्मा है ये कण आत्मा कैसे है परमात्मा क्या है? वाले ब्लॉग में बता चुका हूँ, अभी इस भूत के विवरण को खत्म करूं, तो वो गॉड पार्टिकल हवा से भी हल्का है और वह इस हवा में तैरता है- (इसको ध्यान में रखियेगा )

अब आइये आँख पे आपने कभी गौर किया होगा आईने में या नहीं किये तो अब कर लीजिए आईने में आप अपनी आँखों की काली बिंदी यानी पुतली को गौर से देखिए वो आपको फैलता और सिकोड़ता हुआ दिखेगा। यही राज है भूत देखने का ।

आँखों का तीन आयाम होता है एकल आयाम, द्वितीय आयाम ओर तृतीये आयाम। एकल आयाम का नेत्र पशु और पक्षियों को होता है, द्वितीय आयाम का नेत्र मनुष्यों को और कुछ जीवों को होता है और तृतिय आयाम को हम दिव्य दृश्टी कहते हैं।

एकल आयाम नेत्र वाले जीव छोटी से छोटी चीजों को देख लेते हैं जैसे आपने देखा या सुना होगा कि कुत्ते रात में बहुत भौंक रहे थे जबकि वहाँ कोई नहीं था। लेकिन ऐसा नहीं होता, वहाँ कोई था जो हम नहीं देख सकते लेकिन कुत्ते देख रहे थे तभी वो भौंक रहे थे, और भी इस तरह की कई घटना मैन देखी और सुनी भी है। मेरे गाँव मे मेरे चाचा के पास एक भैंस थी वो एक रात अचानक से ऐसे हलचल मचाने लगी जैसे उसे कोई पकड़ रहा हो या मार रहा हो मेरे भैया तुरंत वहाँ पे आग जलाये और उनका जो टोटका था वो किये और भैंस शांत हो गई लेकिन वो बाहर ही इस तरह से देख रही थी जैसे हम किसी को जाते हुए देख रहे होते हैं। एकल आयाम नेत्र वाले जीव छोटी से छोटी चीज को देख सकते हैं और उनको भी जो हमें दिखते हैं।

द्वितीय आयाम वाले जीव सिर्फ सीमित आकर के वास्तु को ही देख सकते हैं जैसे हम अपना ही उदाहरण लें और इस कारण इसपर मुझे आपको कुछ बोलने या उदाहरण देने की जरूरत नहीं है।
अब तृतीय आयाम वाले कि बात करते हैं तो वो दिव्यनेत्र है जो बड़ी और छोटी वस्तु दोनों को देख सकता है।

मैं यहाँ एक उदाहरण पेश करता हूँ जो तीनों को बता देगा, जैसे हम किसी बड़े से पहाड़ पे एक जगह में हो और एक छोटा सा जीव जैसे बिल्ली हो तो हम वहाँ बिल्ली को देख सकते हैं और पूरे पहाड़ के आकार को नहीं यानी पूरे पहाड़ को चट्टान की तरह नहीं, अब बिल्ली अपने से छोटे चीज को ओर हमें देख सकती है, वो पहाड़ के विषय मे कल्पना भी नही कर सकती। परन्तु पहाड़ बिल्ली को, हमें और अपने बराबर वाले तीनो को देख रहा है । तो यहाँ बिल्ली एकल आयाम, हम द्वितिय आयाम और पहाड़ तृतीय आयाम है।

तो अब मैं बताता हूँ कि हमें भूत कैसे दिखता है?
असल मे होता ऐसा है कि अंधेरे में जब हम होते हैं तब हम किसी चीज को या वैसे भी देखने के लिए आंखों पर जोड़ डालते हैं तब जैसा कि मैंने पहले कहा है की हमारे आँखों की काली पुतली फैलती और सिकुड़ती है तो अंधेरे में देखने के लिए जोड़ डालने पर हमारी पुतली सिकुड़ती है जिस कारण यह कभी कभी एकल आयाम में आ जाती है और तभी कोई आत्मा हवा में तैरते हुए हमारे सामने से गुजरती है और हमे वो दिखती है इसपर हम चौक जाते हैं और हमारी आंख पुनः द्वितीय आयाम में वापस आ जाती है जिस कारण वो हमें नहीं दिखता और हम कहते हैं कि यहाँ भूत था गायब हो गया। ये घटना सिर्फ अंधेरी रात मे ही नहीं होता आप किसी डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं ये जानने के लिए की मनुष्य जब किसी सोच में हो, किसी चीज को गौर से देख रहा हो तब हमारी आँखे इस क्रिया को  करती रहती है और हमे भूत दिखता और गायब हो जाता है।

अब सवाल ये उठता है कि हमें हमारे जानकार का ही भूत कैसे दिखता है?

आइये जानते हैं दरअसल इसके भी कई कारण होते हैं, मैं इसमे से कुछ बताता हूँ । अक्सर आपने देखा होगा कि जिस दिन जिसके विषय मे लोग सोचते हैं उसी दिन उसको उस व्यक्ति का भूत दिखता हैं, कारण है कि हम अपने मस्तिष्क मे उस व्यक्ति की छवि बना लेते हैं इस स्थिति में जब हमारी आँखे एकल आयाम में जाति है तब हमारे मस्तिष्क में बने छवी को ही एक आकर में देखती है ये हमारी कल्पना है। आत्मा एक अत्यंत ही सूक्ष्म कण है जो गतिशील है और इसपर भी चुम्बकीय प्रभाव होता है । ये घटना सपने की तरह है जैसे हम दिन में किसी के विषय में बातें करते हैं या सोचते हैं तो रात में उससे संबंधित सपना देखते हैं क्योंकि वो बातें हमारे मन मे बैठ जाता है।

अब आपको बताता हूँ कि किसी मनुष्य के मरने के बाद उसकी आत्मा उस स्थान पर कैसे बहुत दिनों तक रहती है जिस कारण लोग उस जगह को भूतिया जगह कहते हैं?

तो आपको बता दूँ आप सभी जानते हैं कि इस ब्रह्मांड की हर एक चीज एक दूसरे को अपनी तरफ खिंचती है, और आत्मा पर भी चुम्बकीय प्रभाव होता है तो यही कारण है भूतिया जगह का, मतलब जैसे जिस वस्तु का चुम्बकीय शक्ती का प्रभाव जिस दुसरे वस्तु पर पड़ता है वो दूसरा वस्तु पहले वस्तु का दास हो जाता हैं और इसी दासत्व को माया, ममता या मोह कहते हैं। जैसे पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ज्यादा है और ये चंद्रमा को अपनी ओर आकर्षित करती है ठीक यही बात उस आत्मा के साथ भी है।

विशेष आप मेरा आत्मा और परमात्मा वाले ब्लॉग को पढ़ेंगे तो स्पष्ट हो जाएगा।


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