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ब्रह्मचर्य क्या है?

दोस्तों आज मै आपलोगों को ब्रह्मचर्य के विषय मे बताना चाहता हूँ।

ब्रह्मचर्य होता क्या है?

ब्रह्म का अनुसरण करना ब्रह्मचर्य कहलाता है

और इसको जो करता है वो ब्रह्मचारी है ।

हमारे यहाँ ब्रह्मचारी शब्द सुनते ही लोगों के मन मे एक ऐसे व्यक्ति का खयाल आता है जो पूर्ण रूप से कुँआरा हो।

जो सन्यासियों की तरह अपना जीवन यापन करता हो।

सही है ये भी लेकिन इन सबसे पहले ये जानते हैं कि ब्रह्म क्या है?

ब्रह्म का मतलब जो सभी जानते हैं वो परमेश्वर है लेकिन इसके और भी मीनिंग हैं आइये हम आपको बताते है

ब्रह्म का एक मतलब वेद भी होता है, ब्रह्म का दूसरा मतलब विर्य होता है, और परमेश्वर तो सभी जानते हैं ।

इसीलिये ब्रह्म को जानने वाले को ब्राह्मण कहते हैं खैर ब्राह्मण शब्द पे कभी और बात करेंगें पहले ब्रह्मचारी पे करते हैं।

जैसा कि मैंने आपको ऊपर ब्रह्म का अर्थ बताया उसके अनुसार

1- ब्रह्मचारी= ब्रह्म+चारि= ब्रह्म के अनुसार चलने वाला मतलब ब्रह्म=वेद चारि=चलने वाला= वेद के अनुसार चलने वाला,

2- ब्रह्म= वेद+चारि=रक्षा करने वाला= वेद की रक्षा करने वाला

3- ब्रह्म= वेद+चारि= जानने वाला= वेद को जानने वाला

इन सभी कारणो से ब्राह्मण को ब्रह्मचारी कहते हैं। अर्थात

जो कोई ये सब करता है वो ब्रह्मचारी होगा।

और जो अर्थ आप सभी जानते हैं वो तो है ही, जो व्यक्ति कुंवारा होता है उसे भी ब्रह्मचारी कहते हैं।
अब आप उदाहरण देखें जैसे जीवविज्ञान पढ़ने वाला हर कोई मनुष्य डॉक्टर नहीं बनता।
डॉक्टर का टाइटल पीएचडी करने वाला भी लगाता है लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि वो हॉस्पिटल का डॉक्टर है।
इसी प्रकार जरूरी नहीं कि ब्रह्मचारी सिर्फ स्त्री संपर्क से दूर रहनेवाला ही है।

वेद की रक्षा कई तरह से की जाती है

वेदों को संरक्षित तरीके से रख कर जो आजकल लायब्रेरी में होता है
वेदों का सही अर्थ लोगों तक पहुंचा कर, जन जन में इसके ज्ञान को सुगमता के साथ फैला के, आपके मन मे हो रहा होगा कि जन जन में फैला के कैसे रक्षा होगा? तो मैं बताना चाहूंगा कि हर किसी को वेद का ज्ञान होगा तो कागज के लिखे पुस्तक के नष्ट होने पे फिर से लिखा जा सकता है। जैसे हमारे ज्योतिष शास्त्र के साथ हुआ। जब भारत में मुस्लिमों का शासन था तब वो अपने ज्योतिष को बढ़ाने के लिये हमारे ज्योतिष को खत्म कर रहे थे और इसके परिणाम स्वरूप आज हमे ताजिक नीलकंठी पढ़ना पर रहा है।

वेद के बताए नियमों का पालन करके।
पहले के समय में जाती प्रथा नहीं थीं मतलब अगर कोई शुद्र था तो उसके घर जन्म लेने वाला बच्चा शुद्र नहीं कहलाता था,
बल्कि उसकी जाती उसके कर्मो पे तय होती थी जैसे कोई बच्चा अगर वेद का ज्ञान लेता और देता तो वो ब्राह्मण, जो बनियां का काम करता वो वैश्य आदी।

यहां पे ये बताने का मेरा मतलब ये है कि कई लोगों के मन में मेरा ये आर्टिकल पढ़ने के बाद सवाल आ सकता है कि वेद सिर्फ ब्राह्मण को पढ़ना और पढना है क्षत्रिय को और वैश्य को सिर्फ पढ़ना है और शूद्र को तो पावंदी लगा रखा है, इसीलिए मैंने ये जाती का प्रशंग रखा कि यहाँ ब्राह्मण से तात्पर्य वेद जानने वाले से है भले ही वह किसी भी जाति में जन्म लिया हो।

अब एक सवाल और आता है स्त्रियों को वेद पढ़ने से, ॐ का उच्चारण, गायत्री मंत्र ये सब तो हमारे शास्त्रों में वर्जित किया गया है तो क्या स्त्रियां सिर्फ अपने कुँआरिपन से ही ब्रह्मचारिणी बन सकती है?

तो मैं आपको ये बात दूं की "नहीं" वेद आदि क्रिया स्त्रियों को इसलिए निषेध है क्योंकि - स्त्रियों के शरीर की रचना पुरुषों की तुलना मे कोमल होती है और वेद की ऋचा को जो लोग जानते हैं जो पढ़ते हैं वो बता सकते हैं आपको की इसका उच्चारण करने में नाभि कुण्ड पे जोर पड़ता है और स्त्रियों को इससे शारिरिक नुकसान होने की संभावना रहती है ।
आज विज्ञान के माध्यम से सभी जानते हैं कि स्त्रियों के शरीर मे गर्भाशय नाभि कुण्ड से नीचे होता है ऐसे में वो जब वेद की ऋचा का पाठ करेंगी तो उसके श्वर की विविधता से गर्भाशय पे विपरीत प्रभाव पड़ता है जिससे स्त्रियों में बांझपन का खतरा भी बढ़ जाता है।

मेरा ये बात बहुत से लोगों को गलत लगे, क्योंकि आज वेद की ऋचा सही से पढ़ने वाले बहुत कम हैं तो एक छोटा सा काम आप करके खुद देखिये, आप ॐ शब्द का खुद उच्चारण करें एक बार मे नहीं होगा आप 11 बार कीजिये थोड़ा लम्बा तो आपको महशुश होगा कि इस शब्द के साथ शरीर के अंदरूनी हिस्से में एक कम्पन होती हैं और इसी कम्पन के प्रभाव से बचने के लिए स्त्रियों को ये सब करने से मना किया गया है, पहले के समय मे लोगों के मन मे डर लाने और इन कामों को रोकने के लिए ही इन सबको धर्म, कर्म, पाप और पुण्य से जोड़ा जाता था, ताकि लोग ना करें। वेद के मंत्रों का उच्चारण नाभिकुण्ड से होता है।

तब स्त्रियां वेद का अनुशरण करके, लोगों को ज्ञान बांटके ब्रह्मचारिणी बन सकती है।
स्त्रियां वेद के नियम का भी पालन करके अपने सात्विक जीवन को जी सकती हैं ।

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