TatwaBodhani ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते | पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वशिष्यते ||

प्रज्ञा चक्षु

प्रिये पाठक

आज का समय ऐसा है कि लोग अपने दैनिक कार्यों में इतने व्यस्त होते हैं कि अपने मूल को जानने का समय नहीं होता ऐसे मे उन्हे जो मिलता है उसी को सच्चाई मानते हैं और जो सत्य है उसपर विश्वास नहीं कर पाते इसका कारण है कि वे जो नज़र आता है उसपर अंध विश्वास वे उसके पीछे की छिपी सत्यता को नहीं समझ पाते आज गुरु भी बहोत हैं और उनके शिष्य भी बहोत लेकिन ये रिस्ता बेकार है क्योंकि ये रिस्ता ज्ञान और सत्यता पर ना होके अंधविश्वास और पैसे कमाने का साधन बन गया है लोग इतने अंधे हो जाते हैं कि सहि क्या है नहीं सोच पाते और समझने की भी कोशिश नहीं करते |

हम प्रज्ञा चक्षु के माध्यम से आपको बताने की कोशिश करेंगे कि सत्यता क्या है हम अपनी बात को आपके सामने वैदिक रीति और आज के वैज्ञानिक तरीके से सिद्ध करने की कोशिश करेंग |

आपके मन मे किसि भि प्रकार की दुबिधा हो आप बेझिझक पूछ सकते हैं और मैं अपने क्षमता के अनुसार उसका उत्तर देने की कोशिश करूंगा

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