TatwaBodhani ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते | पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वशिष्यते ||

उपवास क्यों करना चाहिये?

आज बहुत से बाबा और संत है फिर भी लोगों तक सही ज्ञान नहीं पहुंच पाता इसका कारण ये हो सकता है कि या तो हमारे धर्मगुरु सही से हमें बताते नहीं, या फिर हम उनकी बातों में अपना दिमाग लगा देते हैं, या फिर हम उनकी बातों को समझना नहीं चाहते । अब देखें की उनकी बातों में हम अपना दिमाग लगाते हैं तो क्या होता है तो होना क्या है बस sauth indian डिश डोसा को अपने छोले भटुरे की तरह बना दिये और क्या?

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लेकिन हम यहीं पर गलती करते हैं कोई भी धर्मगुरु हो कितना भी गिरा हुआ हो लेकिन वो कभी भी अपने अनुयायियों के बीच गलत प्रवचन नहीं देता वो भले सुनी सुनाई बात ही क्यों न कहे । उसके बात सही होते हैं। अब गलती इसमें हमारी भी है कि हम उसको गुरु या मार्गदर्शक ना समझ के ईश्वर मान लेते हैं और इसका फायदा वो उठाता है, जैसा कि आजकल देखने मे आ रहा है

गुरु हमारे मार्गदर्शक होते हैं ना कि ईश्वर इस पृथ्वी पे ईश्वर का स्थान सिर्फ माँ बाप को ही है और कोई नहीं।

लेकिन आज के समय मे ज्यादातर लोग माँ बाप को कोने

में छोड़ देते हैं और इन पाखंडी बाबाओं के पीछे सबकुछ लुटा देते हैं।

ये कलियुग है इसमें ये सब तो होना ही है लेकिन इस कलियुग में ईश्वर को पाना बहुत आसान है लोग जिन कारणों से ठगे जाते हैं वो काम बहूत आसान है।

हम अपने धर्मों पे विश्वास इसलिए भी खो रहे हैं क्योंकि आजकल पाखंडी बाबाओं की भरमार हो गई है और दूसरा हमारे धर्म को इतना तोड़ मड़ोर के पेस किया जाता है कि हमारा रिवाज, कर्म हमें भारी लगने लगता और हम छोड़ देते हैं। हमें घुटन सी महसूस होने लगती है, हमें अपनी इक्षा के अनुरूप कुछ नहीं करना होता है जिस कारण हम अपने धर्म - कर्म के प्रति उदासीन होने लगे हैं और इसके विपरीत दूसरे धर्म हमें ज्यादा सरल और आकर्षक लगता है, और हम उसकी ओर अपना झुकाव करने लगते हैं। इन सबको मैं अपने अगले ब्लॉग धर्म के प्रति उदासीनता क्यो? में बताऊंगा इसमे मै सिर्फ धर्म और रिवाजों पर चर्चा करूँगा और आपको रूढिवाद से दूर करने का प्रयास करूंगा।

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आखिर रिवाजों की जरुरत क्यों हुई?

हम आपको बताते हैं कि क्यों हुई? असल मे आपको रिवाज़ों के नियम में रखने से हमारे शरीर को स्वस्थ रखा जाता है जैसे उपवास रखने से हमारे शरीर मे जमा हो रहे एक्सट्रा fat जल जाते हैं और हमे मोटापा का खतरा नहीं रहता आज के समय मे मोटापा एक बहूत बड़ी बीमारी है।

तब उपवास करना कौन सा है? अपने शास्त्रों में इतने उपवास दिए हैं कि हम किसि दिन भी भोजन नहीं कर पाएंगे हमारे शास्त्रों में अनेक देवी देवता हैं लेकिन हर व्यक्ति हर देवी देवता की पूजा नहीं करता अतः हम जिन भगवान को पूजते हैं उनके ही उपवास करने चाहिए इस प्रकार हमें सप्ताह में एक उपवास करना चाहिए ज्यादा से ज्यादा

पूजा - पूजा हमें शांति देती है, पूजा से आखिर शांति कैसे मिलती है? तो आपको बताता हूं कि जब हम पूजा करते हैं तब हम स्थिरता के साथ बैठते हैं जिसमे हम थोड़ी देर के लिए पूरे शरीर को शांत स्थिर कर लेते हैं तथा हमारे आस पास धूप और अगरबत्ती की खुश्बू से मन स्वच्छ्ता को प्राप्त करता है और इस कारण मन शुद्ध और विकार रहित लगता है। पूजा ध्यान लगाने का एक प्रक्रिया भी है जिससे हम अपने मन को नियंत्रित करते हैं एवं हमें अपने दिमाग को किसी काम में लगाने का सही तरीका भी मिलता है।

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पूजा एक पद्धति भी है और एक अभ्यास भी।

अभ्यास कहने का मतलब की हम जब पूजा करने के लिए बैठते हैं तब हम अपने मन, मष्तिष्क और ध्यान को केंद्रित करते हैं या करने का प्रयास करते हैं, पूजा के समय जब हम ध्यान लगाते हैं तब हम कई चीजों का स्मरण करते हैं जैसे अपने पीछे के कार्यों का, अपने स्थिती का और अपने ईश्वर का। जब व्यक्ति किसी कार्य में हानि पता है मतलब सफल नहीं होता तब वो ईश्वर के पास बैठके ध्यान में लीन होता है और उसे अपने कार्य मे गलती का बोध हो जाता है, या किसी कार्य को करने का तरीका या रास्ता मिल जाता है।

तो इस प्रकार हम देखें तो पूजा ध्यान लगाने का एवं कार्य के तरीके के लिए प्रैक्टिस है।

अब कोई व्यक्ति किसी कार्य कि सफलता या बीमारी या किसी मनोकामना की पूर्ति के हेतु जो पूजा करता है तो वो एक पद्धत्ति होता है।

पूजा से मनोकामना, बीमारी या इच्छा की पूर्ति कैसे होती है? के जवाब के लिए आप मेरा मंत्र क्या है वाला ब्लॉग देखें।

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