TatwaBodhani ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते | पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा वशिष्यते ||

अतृप्त आत्मा का रहस्य |

आइये आज हम अतृप्त आत्मा के विषय में बात करते हैं। अतृप्त आत्मा क्या है? और क्यों भटकती रहती है? और हमेशा ही अतृप्त क्यों रहती है?, उसे तृप्ति क्यों नहीं मिलती । आज हम आपको इसका कारण बताएँगे और इसका अनुभव भी कराएंगे की क्या किसीको पानी पीने के बाद भी प्यास लगी रह सकती है । श्रीमद्भागवत गीता में भगवान् कहते हैं की जब इंसान की मृत्यु होती है उस समय उसके अंदर यानि मन में जैसा भाव रहता है वैसा ही गति प्राप्त होता है । इस बात को हम अपने पिछले ब्लॉग मुक्ति क्या है में नहीं बताया लेकिन इसरा जरूर कर दिया था कि आत्मा तीन घेरे के अंदर बन्द रहता है, चेतना, मन और बुद्धि।, और इन तीनों के टूटने के बाद ही मुक्ति मिलती है। इस ब्लॉग में कुछ इसी तरह की बातें समझाने की कोशिश की गई है।

मानलीजिए किसी को भूख लगी है, या किसी को प्यास लगी है, या शरीर में कहीं दर्द हो रहा है, या फिर कोई प्रसन्नचित है, या कोई ईश्वर के ध्यान में लीन है, मगर ऐसा बहुत ही कम होता है कि कोई ईश्वर के ध्यान में मग्न हो, तुलसी दास जी रामचरित मानस में लिखते हैं की जनम- जनम मुनि जतन कराही, अंत राम कह आवा नाही। हम सिर्फ अतृप्त अर्थात अधूरी इक्षा के विषय में बात करेंगे आप सब जानते हैं की दुनियां में मौत के हजारों नहीं लाखों में कारण हैं। जो लोग घर में या हॉस्पिटल में किसी असाध्य बीमारी से मरते हैं उनकी आत्मा अक्सर शांत रहती है,क्योंकि उसकी आत्मा कर्म के अनुसार अपनी गति को प्राप्त होती है, और जो लोग अकाल मृत्यु मरते हैं उनकी आत्मा अक्सर भटकती रहती है, जिन लोगों के मन की भावना जितनी तीव्र होगी उनकी आत्मा उतनी ही व्यग्र रहती है, मानलीजिए कोई दर्द से कराह रहा हो और कराहते -कराहते किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसकी आत्मा भी अक्सर कराहते रहेगी, अगर कराहने की गति तीव्र हुई तो आत्मा की कराहने कि या चिल्लाने की आवाज लोगों को कभी -कभी सुनाई देगी । कोई किसी का खून कर देता है तो जिसका खून होता है उसके मन में डर का भाव होता है तो उसकी आत्मा हमेशा डरी हुई रहती है, और जो लोग आत्महत्या कर लेते हैं सबसे बुरी दशा उनकी आत्मा की रहती है उनको बहुत सारे अलौकिक संसाधनों से वंचित होना परता है, सबसे खतरनाक वह आत्मा होती है जो लड़ते -लड़ते मर जाते हैं उनके मन में तो सिर्फ मारने का भाव होता है इसलिए उनकी आत्मा मारने को दौड़ती है, या फिर कोई किसी का खून करने को उद्दत है और तीसरा कोई उसीका खून कर दे तो ऐसे में उसकी आत्मा भी हमेशा खून की प्यासी होती है, हालाँकि सभी आत्मा एक जैसी नहीं होती है जैसे इंसान में अलग - अलग प्रकार के लोग होते हैं क्योंकि आत्मा भी तो पहले इंसान के रूप में ही रहती है, और जैसे पहले आत्मा और परमात्मा में बता चूका हूँ कि आत्मा विशुद्ध आत्मा ही शरीर से बाहर नहीं निकलती है बल्कि उसके साथ मन बुद्धि चेतन इच्छा मोह आदि के अणु से घिरी रहती है, इसलिए मरते वक्त कि इच्छा मोह आत्मा पर हावी रहती है।

अतृप्त आत्मा को तृप्ति क्यों नहीं मिलती, इंसान के शरीर में एक और शुक्ष्म शरीर होता है जो शारीरिक ऊर्जा से बना होता है ये शरीर ठीक वैसे ही बनता है जैसे किसी गैस को, या धुआँ को या पानी को जिस आकार के वास्तु में रख्खा जाए वैसा ही आकार वो लेगा ठीक ऐसे ही शरीरिक ऊर्जा भी लेती है और अकाल मृत्यु में वह शरीर आत्मा के साथ बाहर निकल जाता है और आत्मा के साथ ही रहता है जिसे प्रेत कहते हैं उस प्रेत शरीर में आत्मा को कभी तृप्ति नहीं मिलती है हमारे सनातन धर्म में मरणोपरांत श्राद्ध कर्म में नरायणवली कर्म इसी प्रेत विमुक्ति हेतु किया जाता है, जिसके कारण उस आत्मा को प्रेत शरीर से मुक्ति मिल जाती है आत्मा को इस ऊर्जा के शरीर में तमाम तरह कि कठिनाई का सामना करना परता है, चूँकि उसका शरीर शारीरिक ऊर्जा से बना होता है और पृथ्वी पर हर चीज ऊर्जा छोड़ता है तो जिस चीज का ऊर्जा उस शारीरिक ऊर्जा से अधिक प्रभावशाली होती है वहां उस प्रेत रूपी आत्मा को जाने से कष्ट होता है जैसे सूर्य किरण उस पर पड़ने से उसके शरीर का क्षरण होने लगता है जिससे उसे कष्ट होता है, इसलिए प्रेतात्मा छाया में या सूर्यास्त के बाद बहार निकलता है कुछ चीजों की ऊर्जा ऐसी होती है जिससे प्रेतात्म के शरीर को शुकुन मिलता है जैसे पीपल का पेड़ इमली का पेड़ बाबुल का पेड़ गन्दी जगह जैसे शौचालय आदि ।

अगर किसीको मरते वक्त भूख या प्यास लगी हो तो आत्मा हमेशा भूखी या प्यासी रहती है चाहे वह कितना भी खाना खा ले या फिर पानी पी ले, आप सोचेंगे कि ऐसा भी कभी हो सकता है कि कोई पानी पिए और प्यास न बुझे लेकिन वास्तव में ऐसा ही होता है, हम आपको इसका अनुभव करवाते हैं आपको स्वप्न में कभी प्यास या लघुशंका लगा है तो आप देखे होंगे कि पानी पीने या मूत्रालय जाने के बाद भी प्यास लगी रहती है और तबतक लगी रहती है जबतक आप बिस्तर से उठकर पानी नहीं पी लेते या मूत्रत्याग नहीं कर लेते ऐसा इसलिए होता है कि प्यास आपके भौतिक शरीर को लगी है और पानी आपका शुक्ष्म शरीर पी रहा होता है, उसी तरह भूख या प्यास मरने वाले के भौतिक शरीर को लगी रहती है और उसका आत्मा या शुक्ष्म शरीर कितना भी खाए पीये वह हमेशा भूखा ही रहता है इसलिए उसे अतृप्त कहते हैं, ऐसा नहीं है कि भूखी या प्यासी आत्मा को ही अतृप्तात्मा कहते है भूख प्यास कि जगह कोई तीव्र इक्षा भी हो सकती है जो पूरी नहीं होने के कारण अतृप्त रहती है।

हर इंसान अपनी ज़िंदगी में कोई न कोई इक्षा या लक्ष लेकर जिन्दा रहता है मरणोपरांत भी वह लक्ष आत्मा के मन में जिन्दा रहता है और वह आत्मा अपने लक्ष की ओर बढ़ता है, बुढ़ापे में इंसान को अधिकतर अपने लड़के, पोते का मोह अधिक हो जाता है, ऐसे इंसान के मरने के बाद उसकी आत्मा अपने परिवार के आस - पास ही भटकती रहती है और एक दिन अपने ही परिवार में अपने पोते या परपोते के रूप में जन्म लेता है । महाभारत में वेदव्यास जी कहते हैं कि महाभारत के युद्ध समाप्त होने के बाद अर्जुन श्री कृष्ण से कहते हैं कि मुझे एक बार मेरे पुत्र अभिमन्यु से मिलवाइए इसपर भगवन श्री कृष्ण ने अर्जुन को बहुत समझाया कि मरने वालों से नहीं मिला जाता मरणोपरांत प्राणी से मिलना प्रकृति के नियम के विरुद्ध है परन्तु अर्जुन भगवान् की बात नहीं मानकर जिद्द करता रहा, तब श्री कृष्ण बोले चलो तुम्हारे पुत्र से तुमको मिला देता हूँ और दोनों स्वर्गलोक को चल दिए वहां पहुंचकर अर्जुन देखता है कि कुछ लोगों के साथ अभिमन्यु चौसर खेल रहा है अभिमन्यु को देखकर अर्जुन ने पुत्र पुत्र कहकर जोड़ से पुकारा अभिमन्यु का ध्यान अर्जुन के तरफ गया तो देखा कि अर्जुन बांहे फैलाये उसके तरफ आ रहा है अभिमन्यु उठकर कहा रुको! कौन पुत्र किसका पुत्र तुम मेरे तीन बार पुत्र हो चुके हो मैंने तो तुमको कभी पुत्र कहता हुआ स्वर्ग तक कभी नहीं आया और मैं एक बार तुम्हारा पुत्र हुआ तो तुम पुत्र कहते हुए यहां तक पहुँच गए। तब अर्जुन का पुत्र मोह टूट गया और वापस हस्तिना पुर आगया ।

मनुष्य चाहे जो भी हो उसके जीवन में किसी न किसी वस्तु कि कमी रहती है पृथ्वी पर बहुत कम लोग होंगे जो सर्वसम्पन्न हो, कुछ को धन कि कमी है तो कुछ को गुण कि जिसको जिस चीज की कमी रहती है वह अंदर ही अंदर उसके प्रति आसक्त रहता है, कोई इंसान स्त्री के प्रति अधिक मोहित होता है और मरने के बाद भी स्त्री के आस - पास ही भटकते रहने के कारण ऐसी आत्मा का जन्म अक्सर स्त्री के रूप में होता है एक अनपढ़ आदमी मेहनत और ईमानदारी से काम करता है कुछ दिन बाद उसे काम का अनुभव भी अच्छा हो जाता है मालिक उसे ऊँचे पद देना चाहता है लेकिन अनपढ़ होने के कारण नहीं दे पाता इस बात का उस व्यक्ति को हमेसा मन में मलाल होता है कि कुछ पढ़ा होता तो अच्छी नौकरी मिलता उसे अनपढ़ होने का अफ़सोस जिंदगी भर रहता है, हर व्यक्ति पुरुष हो या स्त्री अपने जीवन में अप्राप्य वस्तु को प्राप्त करना चाहता है और उसके प्रति आसक्त होता है और यही आसक्ति, उस वस्तु के प्रति लगाव ही मनुष्य के अगले जन्म का कारण होता है सिर्फ कारण ही नहीं होता बल्कि उस व्यक्ति कि प्रकृति भी निर्धारित करता है ।

अब एक विचित्र आत्मा के विषय में बात करते हैं कोई-कोई व्यक्ति अति कामुक होता है जो मरने के बाद कहीं प्रेत योनि में चला गया तो उसके प्रेत शरीर में वो कामुकता रह जाती है वो काम के वश में होकर स्त्री के तलाश में रहता है कमालकी बात तो यह है कि वह प्रेत स्त्री के साथ जीवित मर्द की तरह सम्भोग करता है अगर उसकी पत्नी जीवित हो तब तो वो अपने पत्नी के साथ खुलकर सम्भोग करता है और जब पत्नी मर जाता है तो अकेली सोइ स्त्री को देखकर उसका बलात्कार करता है ऐसी एक घटना मेरे गांव में घटी थी एक नव विवाहिता के पति परदेश गया हुआ था घर में सास बहु दोनों रहते थे सास बहार बरामदे में सोती थी और बहु घर के अंदर सोती थी बहु अकेली होती थी एक कामुक प्रेत रात में बहु के कमरे में पहुँच जाता और उसके साथ सम्भोग करता बहु चुप रही सास को नहीं बताई जिसका परिणाम हुआ कि वह प्रेत प्रति दिन आने लगा पांच दिन के बाद वो अपने सास को सारी कहानी बताई उसकी सास मेरे पास आकर मुझे बताई मुझे आश्चर्य हुआ उस प्रेत का कार्यशैली सुनकर, होता ऐसा था जब वो स्त्री सो जाती थी तब वह प्रेत आकर उस स्त्री को नींद में उत्तेजित करता और जब स्त्री उत्तेजित हो जाती तब उसके साथ सम्भोग करता और जब उस स्त्री की आँख खुलती तब तक प्रेत अपना काम कर चूका होता वह स्त्री उस प्रेत को अपने से अलग होते देखती वह प्रेत उस स्त्री से अलग होकर पलंग से नीचे उतरता और गायब हो जाता, मैनें दो यन्त्र दिए सास और बहु दोनों को एक एक पहनने के लिए और सास को भी रात बहु के साथ सोने के लिए कहा और साथ ही हिदायद दिया कि आज रात भी वो आएगा और आप दोनों पर उसका कोई भी अलौकिक शक्ति नहीं चलेगा ज्यादा से ज्यादा एक सामान्य इंसान के तरह उसकी ताकत होगी आप लोगों के लिए, आप डरिएगा मत आप दो आदमी है वो अकेला जब वो घर के अंदर आये तब आप उठकर जल्दी से दरवाजा खोल दीजियेगा दरवाजा खोलते ही उसको जो सजा मिलना है मिल जाएगा, अब रात की वृतांत सुनिए रात में दोनों यन्त्र पहनकर दोनों एक साथ सोइ बहु तो सो चुकी थी सास जाग रही गांव के घर में छत के जगह छप्पर होता है जो पीछे से दीवार पर टिका होता है सास को वो छप्पर दीवार से ऊपर उठने का आभास हुआ और एक चिंगारी घर में आकर गिरा और आदमी बन गया सास झट से उठ बैठी उस प्रेत ने भी देखा कि यहाँ सास भी है प्रेत सास के तरफ लपका सास भी हट्टी कट्ठी थी उसने भी छलांग लगाई उसके तरफ, दोनों भीड़ गए तब तक बहु की नींद खुली वो झट से उठकर दरवाजा खोल दी और तुरंत ही प्रेत गायब हो गया उस दिन के बाद से वो कभी नहीं आया। जो व्यक्ति जीवित में आक्रामक तेवर के होते है वो अगर भूत प्रेत के योनि में चला गया तो वह लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं, इनके कारण ही लोगों में भूत प्रेत का डर बना रहता है। सभी भूत प्रेत खतरनाक नहीं होते जिस तरह इंसान में हर तरह के लोग होते है उसी तरह भूत प्रेत में भी हर तरह के भूत प्रेत होते है। मनुष्य को भला करने वाले भूत तो बहुत मिलते है भूत प्रेत को मनुष्य को खतरे से भी बचाते हुए कई बार देखा गया है ।

Posted By - D. Jha.

यह पोस्ट श्री डी. झा के द्वारा लिखा गया हैं, आप भी अपना कोई अनुभव इसी तरह हमसे शेयर कर सकते हैं ।

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